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If i were the chief minister of the state || अगर मैं राज्य का मुख्यमंत्री होता 

             अगर मैं राज्य का मुख्यमंत्री होता




 
कल्पना के पंख बहुत सुहावने होते हैं । कल्पना की उड़ान भी बहुत ऊँची होती है । मुख्यमंत्री बनने की कल्पना करना क्या मुश्किल है । पर , इस कल्पना के साथ ही साथ कर्त्तव्य एवं जिम्मेवारियों से काँटों भरे ताज की याद भी आ जाती है , जो अदृश्य रूप में मुख्यमंत्री के सर पर होता है ।

बिहार का मुख्यमंत्री एक व्यक्ति नहीं , बल्कि सम्पूर्ण प्रदेश का केन्द्र , उप्रेरक शक्ति और भारतीय सभ्यता , संस्कृति तथा दर्शन का प्रतिनिधि होता है । वह भारतीय लोकतंत्र और अन्तरर्राष्ट्रीयवाद का प्रतीक , राष्ट्र के विकास , मजबूती तथा सामाजिक न्याय का नायक और राष्ट्रीय गौरव का आदर्श होता है ।


मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी प्रदेश को व्यवस्था देने और अमन चैन कायम करने की है । यदि मैं मुख्यमंत्री होता तो प्रदेश एवं देश के निर्माण की रचनातमक भुमिका में सामने आता । सर्वप्रथम मैं परदेश उग्रवादी तथा राष्ट्र विरोधी तत्त्वों को समाप्त करने में सख्ती तथा देश के निर्माण की रचनातमक भुमिका में सामने आता। सर्वप्रथम मैं प्रदेश के उग्रवादी तथा राष्ट्र विरोधी शक्तियों की पहचान करवाता , उनके उत्पन्न होने के कारणों की खोज करता , फिर निर्वाण प्रहार कर उन्हें जड़ मूल से नष्ट करता ।

यदि मैं मुख्यमंत्री बन जाऊँ , तो देश की विशाल जनता के लिए कम - से - कम मूल सुविधा की उपलब्धि को सुनिश्चित करता । ऐसी योजनाएँ तथा कार्यक्रम तैयार किए जाते , जो बिहार की ग्रामीण जनता को रोजगार , भोजन , वस्त्र , आवास और शिक्षा की न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति
सनिश्चित करे । इसके लिए वृहत तथा ग्रामीण उद्योगों को एक - दूसरे का परक बनाने विकास के लिए प्राथमिक योजनाओं के निर्माण का जनान्मुखी तथा विकेन्द्रित ढाँचा देने की बालबद्ध कार्य योजना तैयार करवाता तथा उन्हें सख्ती से कार्यान्वित करता ।

मेरे मुख्यमंत्री होने की स्थिति में कृषि , उद्योग और व्यापार की तरकी होती । प्रदेश में । औद्योगीकरण तेज होता , कृषि को उद्योग का दर्जा देकर जीविकोपार्जन से आगे लाभप्रद क्षेत्र के रूप में परिणत किया जाता । मैं बिहार में श्रम - संस्कृति का सृजन करता जिसमें श्रम का सम्मान होता । मेरे मुख्यमंत्री होने का मकसद जन - जन को गरीबी की दासता से मुक्त कराना होता । इसके लिए प्रदेश में उत्पादन साधनों का विकास विशाल पैमाने पर किया जाता । हर हाथ को काम तथा काम के अनुसार दाम मुहैया करता ।
मेरे मुख्यमंत्री बनने का अर्थ होता सुखी , समृद्ध और शक्तिशाली बिहार जिसमें सबके विकास के समान अवसर तथा सुविधाएँ उपलब्ध होता , मेरे शासन में न तो उग्रवाद का अस्तित्व होता और न भ्रष्टाचारी प्रशासन की आँखों के तारे होते , नारियाँ नहीं सतायी जाता और न ही दहेज के लिए जलायी जाती , न ही दूध के लिए कोई बच्चा तरसता न ही भूख से कसी की जान जाती । सर्वेभवन्तु सुखिनः को आदर्श वाक्य मान मैं सारे प्रदेश का कल्याण कर दिखाता ।




Translation Story in English   If i were the chief minister of the state

If i were the chief minister of the state Imaginary wings are very beautiful. The flight of imagination is also very high. It is difficult to imagine becoming the Chief Minister. But, along with this imagination, duties and responsibilities also remind us of the thorny crown, which is invisibly on the Chief Minister's head. The Chief Minister of Bihar is not a person, but the center of the entire state, the representative of power and Indian civilization, culture and philosophy. He is a symbol of Indian democracy and internationalism, a hero of nation's development, strength and social justice, and an ideal of national pride. It is the responsibility of the Chief Minister to provide order to the state and maintain peace. If I were the Chief Minister, I would have come in the creative role of the creation of the state and the country. First of all, I would come across a strict role in eliminating the extremist and anti-national elements and constructive role of building the country. First of all, I would identify the militant and anti-national forces of the state, search for the reasons for their origin, then strike Nirvana and destroy them from their roots. If I became the Chief Minister, I would have ensured the achievement of at least basic facilities for the vast masses of the country. Such schemes and programs would be prepared which would fulfill the minimum requirement of employment, food, clothing, housing and education to the rural people of Bihar. Make sure For this, to make mass-oriented and rural industries at par with each other, to prepare public-oriented and decentralized plans for the development of primary plans, to prepare an action plan and implement them strictly. In my position as Chief Minister, agriculture, industry and trade would have progressed. In the state. Industrialization would have accelerated, giving agriculture status as an industry and turning it into a profitable sector beyond livelihood. I would have created a labor culture in Bihar where labor would be respected. The aim of my Chief Minister was to free the people from the slavery of poverty. For this, development of production tools was done on a large scale in the state. Used to provide the price to each hand according to work and work. To be my Chief Minister would mean a happy, prosperous and powerful Bihar with equal opportunities and facilities for the development of all, neither militancy existed nor stars of corrupt administration, women were not persecuted nor dowry in my rule. No child would crave for milk, nor would anyone die of hunger. I would have done the welfare of the entire state by assuming the motto of the survey.

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