प्लान की Beginning शुरुआत कैसे करें ? Direct Selling Networking Marketing Training.

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• प्लान दिखाने से पहले जॉइनिंग कैसे कराएं।
• Direct Selling Networking Marketing Training.
• Sir, समय दुनिया की सबसे कीमती चीज है।
• तो समय को बिल्कुल भी बर्बाद किये बिना ।
• मैं आपको अगले 2 Minute के अन्दर में आज की Meeting का Purpose (उद्देश्य मकसद) समझा सकता हूँ ।
• क्या आप मुझे 2 Minute देने को तैयार हैं ।
• आज दुनिया में हर आदमी भाग रहा है आप Road सड़क में देखेंगे तो हर आदमी भाग रहा है।
• कोई Job नौकरी कर रहा है तो कोई Business कर रहा है, तो कोई दुकान चला रहा है ।
• लेकिन हर आदमी भाग रहा है, क्यों भाग रहा है ।
• क्यों के सब को (Money ) पैसा चाहिए ।
• अब पैसा कमाने के पीछे इन्सान का एक मकसद होता है ।
• जिस को हम सपना भी कहते हैं ।
• दुनिया में हर आदमी का कोई ने कोई सपना होता है।
• और हमारे 90 % सपना Common होते हैं जैसे..की....
1. एक अच्छा घर 
2. खुबसूरत सा गाड़ी 
3. बच…

What is social service || सामाज सेवा क्या है कैसे करते हैं ।

समाज सेवा क्या है कैसे करते हैं 



समाज की सेवा अलग से कोई कार्य नहीं होता । मनुष्य अपने कर्तव्यों को अपनी शक्ति के आनुमार ईमानदारी से पूर्ण करता चला जाय तो यही उसकी समाज सेवा है । सब अपने कार्य करते चलें तो कभी दुःख की छाया नहीं पड़े किन्तु ऐसा होता नहीं है । आराम , ऐश्वर्य और बढ़प्पन की भावना सामाजिक उत्थान के साथ मनुष्य में विकसित होती गई । कुछ को मुर्खता जकडा तो कुछ को स्वार्थ ने , फलतः वह कर्तव्यच्च्युत हो गया । ऐसे ही कर्तव्यच्यत लोगों के कर्यों को पूरा करने के लिए कुछ लोगों को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है । जो अपने कर्तव्यों को पूरा करते हुए अन्य का सहयोग करते हैं , वे ही समाज - सेवी हैं । आधुनिक समाज की स्थिति विकृत है । प्रत्येक प्राणी अपने कर्त्तव्य से पलायन कर रहा है । वह समाज निर्माण के कारणों और उद्देश्यों को भूल गया है और उस सम्बन्ध में चिन्तन करना ही नहीं चाहता । सर्वत्र असहयोग का बोलबाला है । संहायता देकर किसी को आगे बढ़ाने के बदले लोग पाँव खींचकर नीचे गिरा देना चाहते हैं । ऐसे क्रूर अनुभवों से गुजरने वाले व्यक्ति समाज विरोधी होते चले जा रहे हैं । उनका कहना है कि समाज ने उनके साथ क्या किया है कि वह समाज के लिए सोचें ? किन्तु इस तरह का चिन्तन दोषपूर्ण है । यह माना जा सकता है कि कुछ व्यक्तियों ने कुछ व्यक्तियों के साथ अपेक्षित कर्त्तव्य को नहीं पूरा किया , उपेक्षा का भाव दिखाया किन्तु इसे ही व्यापक सामाजिक भावना की संज्ञा नहीं दी जा सकती । समाज विशाल है , इसके कार्य व्यापक हैं , इसका उद्देश्य महान है । इसके स्वास्थ्य को अक्षुण्ण बनाये रखना होगा । इसके लिए अनेक कर्त्तव्य के अतिरिक्त समाज सेवा का भी कार्य करना होगा । समाज की प्रगति एक समस्या हो गई है । समाज टूटन का शिकार हो गया है , इसमें बिखराव आता जा रहा है । कई असामाजिक तत्व , कई विदेशी शक्तियाँ भारतीय समाज को तोड़ने के लिए कटिबद्ध हैं । ऐसे तत्व अपने कार्य तो नहीं करते ; दूसरे को भी उनके कर्तव्य पूरा नहीं करने देते । वे स्वयं समाज विरोधी कार्य करते हैं और दूसरों को भी वैसा ही करने के लिए प्रेरित करते हैं । ऐसी दुखद स्थिति में ईमानदार व्यक्ति का कार्य दोहरा और द्विगुणित हो जाता है । आवश्यकता है निष्काम भाव से , नि स्वार्थ भाव से , समाज की सेवा करने की । आपसी सहयोग को और अधिक बढ़ाने की । इस सहयोग को इतनी गहराई देने की आवश्यकता है कि अन्य सामाजिक कार्य की आवश्यकता ही नहीं पड़े । एक उदाहरण से हम इसे समझा सकते हैं । एक मुहल्ले के नुक्कड़ का बिजली बल्ब फ्यूज कर जाता है । उसे बदलना म्युनिसिपैलिटी का कार्य है । उसके आदमी आकर बल्ब बदलेंगे । किन्तु कोई खबर दे , यह आवश्यक है । इसके साथ यह भी आवश्यक है कि म्युनिसिपैलिटी के कर्मचारी तत्परता से , नया बल्ब लगा दें । यह । एक बात है । तस्वीर का दूसरा रुख भी है । उस मुहल्ले का कोई व्यक्ति भी नया बल्ब लाकर बदल सकता है । अगर नहीं बदला जाय तो रात में कितनों को परेशानियाँ हो सकती हैं । एक मुहल्ले म एक बार एक दूसरी स्थिति देखने में आई । रात में एक सज्जन लौटे तो बल्ब फ्यूज पाया । पूसर दिन ऑफिस से लौटते समय वे एक नया बल्ब खरीदकर लाये कि उस बल्ब को बदल । जब नुक्कड़ पर पहुँचे तो देखा कि उनके पड़ोसी सीढ़ी पर चढ़े हुए बल्ब बदल रहे हैं । यह हुई सामाजिक जागरूकता । ऐसी ही जागरूकता अगर प्रत्येक व्यक्ति में हो तो समाज अकल्पनीय ऊँचाइयों को छू सकता है । किन्तु ऐसे उदाहरण दुर्लभ हो गये हैं । सामाजिक जागरूकता के स्थान परं समाज में विरोध फैल गया है । व्यक्तिगत उत्थान और व्यक्तिगत स्वार्थ को महत्व दिया जा रहा है । स्वार्थ लोलुपता ऐसी बढ़ी है कि व्यक्ति अपने सहज मानवीय कर्तव्यों को भी भुला बैठा है । अतः ऐसे लोगों की आवश्यकता आ पड़ी है जो अपने सुख को भुलाकर अपना सारा समय ; अपनी सारी ऊर्जा समाज की सेवा में लगा सकें । ऐसे समाज सेवी अगर निस्वार्थ और निष्काम भाव से अपना कर्त्तव्य पूरा करें तो तभी सामाजिक व्यवस्था ठीक होगी ; कुरीतियाँ खत्म होंगी और उत्थान हो सकेगा । 16 समाज - सेवा के लिए समाजसेवी बनना आवश्यक नहीं है । समाज - सेवा के विभिन्न रूप होते हैं । किसी रूप में किसी ढंग से समाज - सेवा का कार्य किया जा सकता है । आवश्यकता है । तो मात्र ईमानदारी और समर्पण की । आज समाज - सेवा भी एक ढोंग हो गया है । झूठी प्रसिद्धि , झूठे यश की आकांक्षा कितने असामाजिक तत्वों को भी सामाजिक कार्य के लिए प्रेरित करती है । किन्तु इस प्रेरणा के पीछे व्यक्तिगत स्वार्थ होता है । इस ढोंग की पराकाष्ठा यह है कि शिक्षा - प्रासाद का कार्य भी व्यावसायिक किया जा रहा है । थोड़ी वाहवाही मिल जाये या दूसरों को प्रसन्न कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर लिया जाय - यह समाज सेवा नहीं है । म समाज की व्यापकता की भाँति ही समाज - सेवा की भी व्यापकता है । इसे पूरा करने में असीम धैर्य और अतुल मानसिक शक्ति की आवश्यकता है । सामाजिक विच्छृखलता पर दृष्टिपात करते ही समाज की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है और व्रत के रूप में इसे धारण कर पूरा करनेवाले समाज - सेवियों की अनिवार्यता भी स्पष्ट हो जाती है ।


Translation Story of Social service in English 


Social service

 Service to society is not a separate task.  If a man fulfills his duties with the presumptive honesty of his power, then this is his social service.  If everyone goes on doing his work, then there is no shadow of sorrow, but this does not happen.  The feeling of comfort, opulence and exaltation developed in humans with social upliftment.  Some got foolish and some got selfish, as a result, they became dutiful.  Some people have to do additional work to fulfill the duties of the people who are duty bound.  Those who support others in fulfilling their duties, they are the only society.  The condition of modern society is distorted.  Every creature is escaping from its duty.  He has forgotten the reasons and objectives of building a society and does not want to think about it.  Non-cooperation is dominated everywhere.  Instead of helping someone to move forward, people want to drag their feet and drop them down.  People going through such cruel experiences are becoming anti-social.  He says what has society done to him to think for society?  But this type of thinking is faulty.  It may be assumed that some individuals did not fulfill the expected duty with some individuals, showing a sense of neglect but this cannot be termed as a broad social sentiment.  Society is vast, its functions are wide, its purpose is noble.  Its health will have to be intact.  For this, apart from many duties, social work will also have to be done.  The progress of society has become a problem.  Society has become a victim of breakdown, it is being scattered.  Many anti-social elements, many foreign powers are determined to break Indian society.  Such elements do not do their work;  Do not let others do their duties.  They themselves do anti-social work and inspire others to do the same.  In such a tragic situation, the work of an honest person becomes double and double.  There is a need to serve the society in a selfless manner, selflessly.  To increase mutual cooperation more.  There is a need to deepen this cooperation so that other social work is not required.  We can explain this with an example.  The electric bulb of a street corner fuses.  Changing it is an act of municipality.  His men will come and change the bulbs.  But to give some news, it is necessary.  Along with this, it is also necessary that the employees of the municipality promptly install new bulbs.  this .  There is one matter .  The picture also has a second stance.  Anyone from that locality can also change by bringing a new bulb.  If not changed, some people may have problems at night.  Another situation was seen once in a locality.  At night a gentleman returned and found the bulb fuse.  On his return from office on Pusar day, he bought a new bulb and brought it to be replaced.  When he reached the nook, he saw his neighbors changing the bulbs on the ladder.  This is social awareness.  If every person has such awareness, society can touch unimaginable heights.  But such examples have become rare.  Protest has spread in the society instead of social awareness.  Personal upliftment and personal selfishness are being given importance.  Selfish gluttony has increased so much that a person has forgotten his innate human duties.  Hence the need has come for such people who forget their happiness all their time;  So that we can put all our energy in the service of the society  If such a social worker fulfills his duty selflessly and recklessly, then only the social system will be right;  The evils will end and rise.  16 Social service - It is not necessary to be a philanthropist for service.  There are various forms of social service.  In some form, social work can be done in some way.  Needed .  So just honesty and dedication.  Today social service has also become a pretense.  False fame, false Yash's aspiration motivates so many anti-social elements to social work.  But there is a personal interest behind this inspiration.  The culmination of this hypocrisy is that the work of education and administration is also being done commercially.  Get some applause or prove your selfishness by pleasing others - this is not social service.  Like the generality of society, social service is also widespread.  It requires immense patience and immense mental strength to accomplish this.  By looking at the social disorganization, the need of society becomes clear and the imperative of social workers holding it as a fast becomes clear.



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