बिहार पंचायत राज्य अधिनियम, 1993 , Bihar Panchayat State Act, 1993

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   [बिहार अधिनियम संख्या 19, 1993]

बिहार पंचायत राज्य अधिनियम 1947 और बिहार पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम 1961 को निरस्त और प्रतिस्थापित करने के लिए अधिनियम।

उद्देश्य एवं हेतु - 73वां संविधान संशोधन अधिनियम 1912 के प्रभावी होने के फलस्वरूप यथा उसमें समागम परियोजनों, सारभुत तथ्यों और दिशा निर्देशनों को मूर्त रुप देने के लिऐ बिहार पंचायत राज्य अधिनियम, 1947 तथा बिहार पंचायत समिति तथा जिला परिषद अधिनियम,1961 को निरसित कर नया अधिनियम बनाना आवश्यक हो गया है ।

        इस विधेयक द्वारा राज्य में ग्रमीण, परखनड ऐवं जिला स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के माध्यम से निर्वाचित निकायों में अधिकाधिक लोगों की भागीदारी हो ताकी आर्थिक विकास ऐवं समाजिक न्याय के लिए बनाई गई योजनाओं की प्रभावकारी तैयारी एवं का कार्यान्वयन हो इसकी व्यवस्था की गई है।

                 ये विधेयक पंचायतों को ऐसी कार्यो एवं शक्तियों से संपन्न करने हेतु है जिससे कि वे स्थानीय स्वशासन की जीवंत संस्थाओं के रूप में कार्य कर सके और निश्चितता, निरंतरता , ऐवं लोकतांत्रिक भावना और मर्यादा प्रदान करने के अतिरिक्त अपने कार्यों …

विज्ञान के बढ़ते चरण पर निबंध || Vigyan ke badhte charan par Nibandh Likhen

विज्ञान के बढ़ते चरण पर निबंध या
विज्ञान का महत्व या विज्ञान : वरदान या अभिशाप
(Vigyan ke badhte charan par Nibandh Likhen )









आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान के सहारे ही आज का मनुष्य प्रगति के शिखर पर चढ़ता चला जा रहा है । उसने धरती का कण - कण खोज लिया है । उसकी ऊर्जा एवं शक्ति को पहचान लिया है । धरती के भीतर पूँजी को भी उजागर किया है । विभिन्न प्रकार के खनिज , धातु , कोयला , तेल सबका वैज्ञानिक उपयोग करके अपनी सुख - सुविधाओं को बढ़ाया है । आकाश में नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति को जाना - समझा है ।

आज के प्रगतिशील संसार में मनुष्य , समाज और राष्ट्र के अस्तित्व का विकास करने वाली जो वस्तुएँ - सुविधाएँ उपलब्ध हैं , वे सभी विज्ञान की ही देन हैं । यह विज्ञान की ही देन है कि आज सारा संसार सिमट आया है । कोई देश , समाज अब एक - दूसरे से बहुत दूर नहीं रह गया है । रेल , मोटर , तथा वायुयान जैसे अनेक साधन उपलब्ध हैं , जिनसे हम कम समय में बहुत दूर को यात्रा सुविधापूर्वक कर सकते हैं । आज पेट्रोल , डीजल , गैस , विद्युत और परमाणु की शक्ति से बड़े - बड़े आविष्कार करके मनुष्य की कार्य - क्षमता में असाधारण वृद्धि कर दी गई है । जिस काम को सैकड़ों - हजारों आदमी कई वर्षों में कर सकते थे , उसे यंत्रों और ऊर्जा की शक्ति के सहारे कुछ ही पलो में संपन्न कर दिया जाता है ।

आज हम तार , टेलीफोन , बेतार के तार , फैक्स , इंटरनेट , ई - मेल द्वारा संसार के कोने - कोने में बैठे अपने संबंधी से संपर्क करने के साथ अपेक्षित जानकारी और सूचना भी प्राप्त कर सकते हैं । विज्ञान की खोज का ही परिणाम है कि अब कोई रोग असाध्य नहीं रहा । घातक तथा संक्रामक बीमारियों के टीके खोज लिए गए हैं । रोग - निदान से संबंधित अनेक वेज्ञानिक विधियाँ और उपकरण तैयार कर लिए गए हैं । शल्य - चिकित्सा में तो विज्ञान ने अनेक चमत्कार कर दिखाए हैं । यहाँ ताकि हृदय और मस्तिष्क की शल्य चिकित्सा की उद्भुत विधियाँ विकसित हो गई हैं । कृत्रिम अंगों का प्रत्यारोपण , परखनली से संतानोत्पत्ति , भ्रूण अवस्था में ही लिंग की पहचान , क्लोनिंग के द्वारा मानव की प्रतिकृति तैयार करना जैसे कारनामें भी विज्ञान ने कर दिखाए हैं ।

विज्ञान ने ही रेडियो , सिनेमा , टेलीविजन , वीडियो आदि साधनों का आविष्कार किया , जो ज्ञानवर्धन के साथ - साथ नए मनोरंजन के प्रारूप हमारे सामने प्रस्तुन करते जा रहे हैं । विज्ञान के आधुनिकतम चमत्कारों में गणना - यंत्र और कम्प्यूटर सम्मिलित हैं । जटिल से जटिल गणितीय समस्याओं का समाधान क्षण - मात्र में मिल जाता है । इसी प्रकार नई - से - नई जानकारियाँ कम्प्यूटर के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से पलक झपकते ही प्राप्त हो जाती हैं ।
अंतरिक्ष - यानों से प्राप्त जानकारी के आधार पर अंतरिक्ष की बहुत - सी गुप्त जानकारियाँ मनुष्य को प्राप्त हुई हैं । अंतरिक्ष में इस खोज का भी लाभ विभिन्न रूपों में हमें मिल रहा है । अब तो अंतरिक्ष में मानव - बस्तियाँ बसाने का प्रयास भी किया जा रहा है । अंतरिक्ष में सैर - सपाटे के लिए जाने लगे हैं । चन्द्रमा के रहस्यों के बारे में तो वैज्ञानिक पहले ही जान चुके थे , अब अपने सौर - मंडल के दूसरे ग्रहों की जानकारी प्राप्त करने के प्रयास भी हो रहे हैं ।

रॉकेट , मिसाइल , प्रक्षेपास्त्र तथा बमों के रूप में मनुष्य के पास ऐसी शक्ति आ गई है कि वह हजारों किलोमीटर दूर बैठे अपने शत्रु ठिकानों पर आक्रमण कर सकता है । नभ और स्थल के अतिरिक्त जल के भीतर घुसकर भी शत्रु को नष्ट कर सकता है ! विश्व विकसित देशों के पास एटम बम , हाइड्रोजन बम और अन्य प्रकार के विनाशकारी शस्त्रों का बहुत बड़ा भंडार जमा हो गया है । विज्ञान का यह चमत्कार मानवता के हित में नहीं है किंतु इस वैज्ञानिक खोज का उपयोग मानवता की भलाई के लिए भी किया जा सकता है और अब मनुष्य इस सकारात्मक दृष्टि से ही वैज्ञानिक उत्कर्ष के बारे में सोच रहा है ।

मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं कीपूर्ति करने वाले साधनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है । कृषि , पशुपालन , उद्योग और बागवानी में उत्पादन बढ़ाने के लिए तमाम नए - नए आविष्कार हुए हैं । उन्नत बीजों , रासायनिक खादों तथा नए - नए यंत्रों के प्रयोग ने कृषि - उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया है । पशुओं के नस्ल - सुधार , रोगोपचार , दुग्ध - उत्पादकों के निर्माण से पशुपालन के क्षेत्र में प्रगति हुई है । बड़े - बड़े उद्योग स्थापित हो गए हैं । तीव्र गति से उत्पादन करने वाली मशीनों का निर्माण हुआ है ।

मानव जीवन के विकास में विज्ञान का बड़ा महत्व है । परंतु विज्ञान से प्राप्त शक्ति और सुविधाओं का प्रयोग मानव - कल्याण के लिए ही हो , तभी इस वैज्ञानिक प्रगति की सार्थकता और उपयोगिता है । 

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